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mahabharat 7.100.d1: महाराज! जैसे पूर्वकाल में देवताओं और दानवों के युद्ध में जम्भासुर को मारने के इच्छुक इन्द्र और भगवान विष्णु दानवों को तिनके के समान तुच्छ समझकर आगे बढ़े थे (उसी प्रकार आज भी श्रीकृष्ण और अर्जुन जयद्रथ को मारने के लिए बड़े वेग से आगे बढ़ रहे हैं)।   |   mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  7.100.d1 
(यथा दैवासुरे युद्धे तृणीकृत्य च दानवान्।
इन्द्राविष्णू पुरा राजन् जम्भस्य वधकाङ्क्षिणौ॥)
 
 
अनुवाद
महाराज! जैसे पूर्वकाल में देवताओं और दानवों के युद्ध में जम्भासुर को मारने के इच्छुक इन्द्र और भगवान विष्णु दानवों को तिनके के समान तुच्छ समझकर आगे बढ़े थे (उसी प्रकार आज भी श्रीकृष्ण और अर्जुन जयद्रथ को मारने के लिए बड़े वेग से आगे बढ़ रहे हैं)।
 
King! Just as in the past, in the war between gods and demons, Indra and Lord Vishnu, who wanted to kill Jambhasur, proceeded forward considering the demons as insignificant as straws (in the same way, Shri Krishna and Arjun are moving forward with great speed to kill Jayadrath).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)