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mahabharat 7.100.4: यह आश्चर्य की बात थी कि समस्त महारथी मिलकर भी पैदल युद्ध करते हुए कुन्तीपुत्र अर्जुन को नहीं रोक सके॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.100.4 
पदातिनं तु कौन्तेयं युध्यमानं महारथा:।
नाशक्नुवन् वारयितुं तदद्भुतमिवाभवत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
यह आश्चर्य की बात थी कि समस्त महारथी मिलकर भी पैदल युद्ध करते हुए कुन्तीपुत्र अर्जुन को नहीं रोक सके॥4॥
 
It was an astonishing thing that all the great warriors together could not stop Arjuna, the son of Kunti, while he was fighting on foot. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)