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mahabharat 7.100.34: तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए अनेक राजाओं तथा अन्य क्षत्रियों ने अर्जुन को घेर लिया, जो जयद्रथ को मारना चाहते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.100.34 
ततो नृपतय: क्रुद्धा: परिवव्रुर्धनंजयम्।
क्षत्रिया बहवश्चान्ये जयद्रथवधैषिणम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए अनेक राजाओं तथा अन्य क्षत्रियों ने अर्जुन को घेर लिया, जो जयद्रथ को मारना चाहते थे।
 
Thereafter many kings and other kshatriyas filled with anger surrounded Arjuna, who wanted to kill Jayadratha. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)