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mahabharat 7.100.32: सेना में प्रवेश करके श्रीकृष्ण ने अपने घोड़ों को बड़ी तेजी से आगे बढ़ाया और जोर से अपना पांचजन्य शंख बजाया, जो बगुले के समान श्वेत था।   |   mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.100.32 
गाहमानस्त्वनीकानि तूर्णमश्वानचोदयत्।
बलाकाभं तु दाशार्ह: पाञ्चजन्यं व्यनादयत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
सेना में प्रवेश करके श्रीकृष्ण ने अपने घोड़ों को बड़ी तेजी से आगे बढ़ाया और जोर से अपना पांचजन्य शंख बजाया, जो बगुले के समान श्वेत था।
 
Entering the army, Sri Krishna drove His horses forward with great speed and loudly blew His Panchajanya conch, which was as white as that of a heron.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)