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mahabharat 7.100.30: जिस प्रकार क्रोध में भरे हुए यमराज को रोकना असम्भव है, उसी प्रकार आपके सैनिक समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ महाबाहु अर्जुन को आगे बढ़ने से नहीं रोक सके।   |   mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.100.30 
तं प्रयान्तं महाबाहुं सर्वशस्त्रभृतां वरम्।
नाशक्नुवन् वारयितुं योधा: क्रुद्धमिवान्तकम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार क्रोध में भरे हुए यमराज को रोकना असम्भव है, उसी प्रकार आपके सैनिक समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ महाबाहु अर्जुन को आगे बढ़ने से नहीं रोक सके।
 
Just as it is impossible to stop Yamaraja who is filled with rage, similarly your soldiers could not stop the mighty-armed Arjuna, the best among all weapon-bearers, from advancing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)