Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.100.21-22: हम चीखते-चिल्लाते रहे और उन्हें रोकने की कोशिश करते रहे, लेकिन कुछ न हो सका। श्रीकृष्ण और अर्जुन, जो कवच पहने हुए थे और शत्रुओं को संताप दे रहे थे, हम सब क्षत्रियों के सामने, हमारी शक्ति की परवाह न करते हुए, एक ही रथ पर सवार होकर पूरे राज दरबार में अपना पराक्रम दिखाते हुए, बिना किसी बाधा के आगे बढ़ते गए, जैसे कोई बच्चा अपने खिलौनों से खेलते हुए बाहर निकल जाता है। | mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हम चीखते-चिल्लाते रहे और उन्हें रोकने की कोशिश करते रहे, लेकिन कुछ न हो सका। श्रीकृष्ण और अर्जुन, जो कवच पहने हुए थे और शत्रुओं को संताप दे रहे थे, हम सब क्षत्रियों के सामने, हमारी शक्ति की परवाह न करते हुए, एक ही रथ पर सवार होकर पूरे राज दरबार में अपना पराक्रम दिखाते हुए, बिना किसी बाधा के आगे बढ़ते गए, जैसे कोई बच्चा अपने खिलौनों से खेलते हुए बाहर निकल जाता है।
We kept screaming and shouting and trying to stop them, but nothing could be done. Shri Krishna and Arjuna, who were in armor and were tormenting the enemies, in front of all of us Kshatriyas, ignoring our strength, showed their prowess in a single chariot to the entire royal court and went ahead unhindered, just like a child goes out while playing with his toys.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥