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mahabharat 7.100.20: उस अद्भुत एवं रोमांचकारी युद्ध को देखकर आपकी समस्त सेना अपने साथियों को पुकारने लगी- 'वीरों! ऐसा नहीं हो सकता। तुम सब लोग शीघ्रता से उनका पीछा करो।'   |   mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.100.20 
त्वत्सेना: सर्वतो दृष्ट्वा लोमहर्षणमद्भुतम्।
त्वरध्वमिति चाक्रन्दन् नैतदस्तीति चाब्रुवन्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस अद्भुत एवं रोमांचकारी युद्ध को देखकर आपकी समस्त सेना अपने साथियों को पुकारने लगी- 'वीरों! ऐसा नहीं हो सकता। तुम सब लोग शीघ्रता से उनका पीछा करो।'
 
Seeing that wonderful and thrilling action, your entire army started calling out to their companions - 'Heroes! This cannot happen. All of you chase them quickly.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)