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mahabharat 7.100.15: उन्होंने अपने दोनों हाथों से बाण निकालकर घोड़ों को मल दिया और उन्हें अच्छी तरह चलाकर पानी पिलाया ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.100.15 
शल्यानुद्‍धृत्य पाणिभ्यां परिमृज्य च तान् हयान्।
उपावर्त्य यथान्यायं पाययामास वारि स:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने दोनों हाथों से बाण निकालकर घोड़ों को मल दिया और उन्हें अच्छी तरह चलाकर पानी पिलाया ॥15॥
 
He took out arrows from both his hands and rubbed the horses and after making them walk properly, he gave them water to drink. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)