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mahabharat 7.100.13: हे प्रजानाथ! आपके समस्त सैनिकों के सामने ही कमल-नेत्र श्रीकृष्ण ने उन घोड़ों को बिना किसी चिन्ता के चलाया॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.100.13 
उपावर्तयदव्यग्रस्तानश्वान् पुष्करेक्षण:।
मिषतां सर्वसैन्यानां त्वदीयानां विशाम्पते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! आपके समस्त सैनिकों के सामने ही कमल-नेत्र श्रीकृष्ण ने उन घोड़ों को बिना किसी चिन्ता के चलाया॥13॥
 
O Prajanath! In front of all your soldiers, the lotus-eyed Sri Krishna made those horses walk without any anxiety. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)