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mahabharat 7.100.11: उन दो महान योद्धाओं ने हममें बहुत भय पैदा कर दिया और निर्भयतापूर्वक तथा बिना किसी हिचकिचाहट के युद्ध की दहलीज पर अपना भयानक तेज प्रदर्शित किया।   |   mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.100.11 
भयं विपुलमस्मासु तावधत्तां नरोत्तमौ।
तेजो विदधतुश्चोग्रं विस्रब्धौ रणमूर्धनि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उन दो महान योद्धाओं ने हममें बहुत भय पैदा कर दिया और निर्भयतापूर्वक तथा बिना किसी हिचकिचाहट के युद्ध की दहलीज पर अपना भयानक तेज प्रदर्शित किया।
 
Those two great warriors instilled great fear in us and, fearlessly and without hesitation, displayed their dreadful brilliance at the threshold of battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)