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mahabharat 7.100.10: क्या संसार में इससे भी अधिक अद्भुत घटना कोई है कि अर्जुन और श्रीकृष्ण ने उस भयंकर युद्ध में भी रथ से घोड़े खोल दिए?॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 100: श्रीकृष्णके द्वारा अश्वपरिचर्या तथा खा-पीकर हृष्ट-पुष्ट हुए अश्वोंद्वारा अर्जुनका पुन: शत्रुसेनापर आक्रमण करते हुए जयद्रथकी ओर बढ़ना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.100.10 
किमद्भुततमं लोके भविताप्यथवा ह्यभूत्।
यदश्वान् पार्थगोविन्दौ मोचयामासतू रणे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
क्या संसार में इससे भी अधिक अद्भुत घटना कोई है कि अर्जुन और श्रीकृष्ण ने उस भयंकर युद्ध में भी रथ से घोड़े खोल दिए?॥10॥
 
Is there any more wonderful event in the world than the fact that Arjuna and Shri Krishna untied the horses from the chariot even in that terrible battle? ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)