Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.10.8-11: जो परमानंद में मदमस्त होकर बहता है, जो हथिनी के साथ समागम के समय विरोधी हाथी पर आक्रमण करता है, जो गजराज के समान वेगवान और बलवान है तथा हाथी योद्धाओं के लिए अजेय है, जो कौरवों पर अत्यन्त क्रोधित है, जो महारथी है, जिसने रणभूमि में अनेक योद्धाओं को मार डाला है, जो अत्यंत वीर, धैर्यवान और सत्यवादी है तथा जो अपनी भयंकर दृष्टि मात्र से दुर्योधन की सम्पूर्ण सेना को नष्ट कर सकता है, जो अपनी क्रोध भरी दृष्टि मात्र से शत्रु का संहार करने में समर्थ है, जो विजय के लिए प्रयत्नशील है, जो अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं होता, जिसने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया है और जो संसार में अत्यन्त प्रतिष्ठित है, वह मेरे पक्ष का कौन-सा वीर योद्धा है जिसने प्रसन्न मुख वाले धनुर्धर युधिष्ठिर को द्रोणाचार्य के सामने आते देखकर रोक दिया था?॥8-11॥   |   mahabharat अध्याय 7.10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 8-11
 
 
श्लोक  7.10.8-11 
प्रभिन्नमिव मातङ्गं यथा क्रुद्धं तरस्विनम्।
प्रसन्नवदनं दृष्ट्वा प्रतिद्विरदगामिनम्॥ ८॥
वासितासंगमे यद्वदजय्यं प्रति यूथपै:।
निजघान रणे वीरान् वीर: पुरुषसत्तम:॥ ९॥
यो ह्येको हि महावीर्यो निर्दहेद् घोरचक्षुषा।
कृत्स्नं दुर्योधनबलं धृतिमान् सत्यसंगर:॥ १०॥
चक्षुर्हणं जये सक्तमिष्वासधरमच्युतम्।
दान्तं बहुमतं लोके के शूरा: पर्यवारयन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो परमानंद में मदमस्त होकर बहता है, जो हथिनी के साथ समागम के समय विरोधी हाथी पर आक्रमण करता है, जो गजराज के समान वेगवान और बलवान है तथा हाथी योद्धाओं के लिए अजेय है, जो कौरवों पर अत्यन्त क्रोधित है, जो महारथी है, जिसने रणभूमि में अनेक योद्धाओं को मार डाला है, जो अत्यंत वीर, धैर्यवान और सत्यवादी है तथा जो अपनी भयंकर दृष्टि मात्र से दुर्योधन की सम्पूर्ण सेना को नष्ट कर सकता है, जो अपनी क्रोध भरी दृष्टि मात्र से शत्रु का संहार करने में समर्थ है, जो विजय के लिए प्रयत्नशील है, जो अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं होता, जिसने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया है और जो संसार में अत्यन्त प्रतिष्ठित है, वह मेरे पक्ष का कौन-सा वीर योद्धा है जिसने प्रसन्न मुख वाले धनुर्धर युधिष्ठिर को द्रोणाचार्य के सामने आते देखकर रोक दिया था?॥8-11॥
 
Who is the one who flows intoxicated with ecstasy, who attacks the opposing elephant at the time of mating with the female elephant, who is as swift and powerful as an elephant king and is invincible for the elephant warriors, who is very angry with the Kauravas, who is a great warrior who has killed many warriors in the battlefield, who is extremely brave, patient and truthful and who can destroy the entire army of Duryodhana with his fierce glance alone, who is capable of killing the enemy with just his angry glance, who strives for victory, who never deviates from his limits, who has controlled his senses and is highly respected in the world, which brave warrior from my side stopped that happy-faced archer Yudhishthir when he saw him coming in front of Dronacharya?॥ 8-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)