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श्लोक  7.10.74 
एते चान्ये च बहवो येषामर्थाय संजय।
त्यक्तार: संयुगे प्राणान् किं तेषामजितं युधि॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
संजय! इन और अन्य अनेक वीर पुरुषों के लिए, जो युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार हैं, क्या कोई ऐसी चीज़ है जिसे जीता न जा सके?
 
Sanjay! For these and many other brave men who are ready to sacrifice their lives in the war, is there anything that cannot be won?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)