श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  7.10.63 
उत्सङ्ग इव संवृद्धं द्रुपदस्यास्त्रवित्तमम्।
शैखण्डिनं शस्त्रगुप्तं के च द्रोणादवारयन्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
वे कौन वीर थे जिन्होंने द्रुपद की गोद में पलने वाले, शस्त्रों से सुरक्षित, तथा शस्त्रज्ञों में श्रेष्ठ शिखण्डीपुत्र को द्रोणाचार्य के पास आने से रोका था ?॥ 63॥
 
Who were the heroes who prevented the son of Shikhandi, who was brought up in the lap of Drupada and was protected by weapons, and who was the best among the experts of weapons, from coming to Dronacharya?॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)