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mahabharat 7.10.53: क्षत्रंजय, क्षत्रदेव और दूसरों को सम्मान देने वाले क्षत्रवर्मा - ये धृष्टद्युम्न के तीन वीर पुत्र हैं। किन वीर पुरुषों ने उन्हें द्रोण के पास आने से रोका था?॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 7.10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.10.53 
क्षत्रंजय: क्षत्रदेव: क्षत्रवर्मा च मानद:।
धृष्टद्युम्नात्मजा वीरा: के तान् द्रोणादवारयन्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रंजय, क्षत्रदेव और दूसरों को सम्मान देने वाले क्षत्रवर्मा - ये धृष्टद्युम्न के तीन वीर पुत्र हैं। किन वीर पुरुषों ने उन्हें द्रोण के पास आने से रोका था?॥ 53॥
 
Kshatranjaya, Kshatradev and Kshatravarma who gives respect to others - these are the three brave sons of Dhrishtadyumna. Which brave men stopped them from coming to Drona?॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)