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mahabharat 7.10.50: जब युवा अवस्था और युवा बुद्धि से शत्रु योद्धाओं का शिकारी सुभद्राकुमार द्रोणाचार्य पर आक्रमण कर रहा था, तब आपकी क्या स्थिति थी? 50॥   |   mahabharat अध्याय 7.10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.10.50 
तरुणस्तरुणप्रज्ञ: सौभद्र: परवीरहा।
यदाभ्यधावद् वै द्रोणं तदाऽऽसीद् वो मन:कथम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
जब युवा अवस्था और युवा बुद्धि से शत्रु योद्धाओं का शिकारी सुभद्राकुमार द्रोणाचार्य पर आक्रमण कर रहा था, तब आपकी क्या स्थिति थी? 50॥
 
How were you feeling when Subhadrakumar, the hunter of enemy warriors with his youthful age and youthful intelligence, attacked Dronacharya? 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)