vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न
»
श्लोक 5
श्लोक
7.10.5
आसनं प्राप्य राजा तु मूर्च्छयाभिपरिप्लुत:।
निश्चेष्टोऽतिष्ठत तदा वीज्यमान: समन्तत:॥ ५॥
अनुवाद
सिंहासन पर पहुँचकर भी राजा धृतराष्ट्र अचेत होकर गिर पड़े और गतिहीन हो गए। उस समय चारों ओर से उन्हें भोजन परोसा जा रहा था।
Even after reaching the throne, King Dhritarashtra fell unconscious and was motionless. At that time food was being offered to him from all sides. 5.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×