श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  7.10.45-46 
स्त्रीपुंसयोर्नरव्याघ्रो य: स वेद गुणागुणान्।
शिखण्डिनं याज्ञसेनिमम्लानमनसं युधि॥ ४५॥
देवव्रतस्य समरे हेतुं मृत्योर्महात्मन:।
द्रोणायाभिमुखं यान्तं के शूरा: पर्यवारयन्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वह कौन वीर है जो अपने अनुभव से नर-नारी दोनों शरीरों के गुण-दोषों को जानता है, जिसका मन युद्धभूमि में कभी उदास नहीं होता, जो युद्धभूमि में महाबली भीष्म की मृत्यु का कारण बना, उस द्रुपदपुत्र शिखण्डी को द्रोणाचार्य के सामने खड़े होने से कौन रोक पाया?॥45-46॥
 
Who is the brave soul who knows through his own experience the virtues and demerits of both male and female bodies, whose mind is never gloomy on the battlefield, who became the cause of the death of the great Bhishma on the battlefield, that Shikhandi, the son of Drupada, from standing in front of Dronacharya?॥ 45-46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)