श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.10.44 
योऽवधीत् केतुमान् वीरो राजपुत्रं दुरासदम्।
अपरान्तगिरिद्वारे द्रोणात् कस्तं न्यवारयत्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अपरान्त पर्वत के द्वार पर स्थित दुर्जय राजकुमार को मारने वाले वीर केतुमान को द्रोणाचार्य के पास आने से किसने रोका था ?॥ 44॥
 
Who stopped Ketuman, the brave man who killed the formidable prince situated in the gateway of Aparant mountain, from coming to Dronacharya?॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)