श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.10.43 
एकोऽपसृत्य चेदिभ्य: पाण्डवान् य: समाश्रित:।
धृष्टकेतुं समायान्तं द्रोणं कस्तं न्यवारयत्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
चेदि देश से आकर पाण्डव पक्ष की शरण लेने वाले धृष्टकेतु को अकेले ही द्रोण के पास आने से किसने रोका था ?॥ 43॥
 
Who prevented Dhrishtaketu, who alone had come from Chedi country and taken refuge in the Pandava side, from coming to Drona?॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)