Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.10.40-42: पांचालों में श्रेष्ठ, उत्तम कुल और यश का प्रेमी, सदा शुभ कर्म करने वाला, युद्ध में उत्तम आत्मबल प्रदर्शित करने वाला, अर्जुन की सेवा में तत्पर, मेरा अनिष्ट करने में तत्पर, यमराज, कुबेर, सूर्य, इन्द्र और वरुण के समान तेजस्वी, प्रसिद्ध गुरु और घोर युद्ध में प्राणों की बाजी लगाकर भी द्रोणाचार्य का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहने वाला वीर धृष्टद्युम्न! योद्धाओं ने क्या रोका? | mahabharat अध्याय 7.10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पांचालों में श्रेष्ठ, उत्तम कुल और यश का प्रेमी, सदा शुभ कर्म करने वाला, युद्ध में उत्तम आत्मबल प्रदर्शित करने वाला, अर्जुन की सेवा में तत्पर, मेरा अनिष्ट करने में तत्पर, यमराज, कुबेर, सूर्य, इन्द्र और वरुण के समान तेजस्वी, प्रसिद्ध गुरु और घोर युद्ध में प्राणों की बाजी लगाकर भी द्रोणाचार्य का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहने वाला वीर धृष्टद्युम्न! योद्धाओं ने क्या रोका?
The best among the Panchalas, a lover of the best clan and fame, always doing good deeds, displaying excellent self-power in battle, ready to serve Arjuna, ready to do me harm, as brilliant as Yamraj, Kuber, Surya, Indra and Varun, a famous master and the brave Dhrishtadyumna, who is always ready to face Dronacharya at the risk of his life in a fierce battle. The warriors stopped? 40-42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥