श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.10.28 
विष्वक्सेनो यस्य यन्ता यस्य योद्धा धनंजय:।
अशक्य: स रथो जेतुं मन्ये देवासुरैरपि॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मैं देवताओं और दानवों के लिए भी उस रथ को जीतना असंभव मानता हूँ, जिसका सारथि भगवान श्रीकृष्ण हैं और योद्धा वीर धनंजय हैं।
 
I consider it impossible for even the gods and demons to conquer that chariot whose charioteer is Lord Krishna and the warrior is the brave Dhananjaya. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)