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mahabharat 7.10.23: उस अवसर पर क्या पार्थ ने अपने बाणों से आपके सैनिकों के प्राण नहीं लिये थे? जैसे वायु बड़े वेग से चलकर बादलों को छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार अर्जुन ने भी अपने तीव्र बाणों से शत्रु राजाओं को घायल कर दिया होगा॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 7.10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.10.23 
कच्चिन्नापानुदत् प्राणानिषुभिर्वो धनंजय:।
वातो वेगादिवाविध्यन्मेघान् शरगणैर्नृपान्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
उस अवसर पर क्या पार्थ ने अपने बाणों से आपके सैनिकों के प्राण नहीं लिये थे? जैसे वायु बड़े वेग से चलकर बादलों को छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार अर्जुन ने भी अपने तीव्र बाणों से शत्रु राजाओं को घायल कर दिया होगा॥ 23॥
 
On that occasion, did Partha not take the lives of your soldiers with his arrows? Just as the wind blows with great force and shatters the clouds, similarly Arjuna must have wounded the enemy kings with his swift arrows.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)