vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 10: राजा धृतराष्ट्रका शोकसे व्याकुल होना और संजयसे युद्धविषयक प्रश्न
»
श्लोक 2
श्लोक
7.10.2
तं विसंज्ञं निपतितं सिषिचु: परिचारिका:।
जलेनात्यर्थशीतेन वीजन्त्य: पुण्यगन्धिना॥ २॥
अनुवाद
उस समय राजा धृतराष्ट्र की दासियाँ मूर्छित पड़े हुए उन्हें पंखा झलने लगीं और उन पर अत्यन्त सुगन्धित एवं शीतल जल छिड़कने लगीं॥ 2॥
At that time, King Dhritarashtra's maids began fanning him, who was lying unconscious, and sprinkling extremely fragrant and cool water on him.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×