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mahabharat 7.1.52: क्या कर्ण ने लुप्त भाग को पूरा करके शत्रुओं के हृदय में भय उत्पन्न कर दिया था? संजय! संसार में कर्ण को 'पुरुषसिंह' के नाम से जाना जाता है। 52.   |   mahabharat अध्याय 7.1: भीष्मजीके धराशायी होनेसे कौरवोंका शोक तथा उनके द्वारा कर्णका स्मरण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.1.52 
तत् खण्डं पूरयन् कर्ण: परेषामादधद् भयम्।
स हि वै पुरुषव्याघ्रो लोके संजय कथ्यते॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
क्या कर्ण ने लुप्त भाग को पूरा करके शत्रुओं के हृदय में भय उत्पन्न कर दिया था? संजय! संसार में कर्ण को 'पुरुषसिंह' के नाम से जाना जाता है। 52.
 
Did Karna create fear in the hearts of his enemies by completing the missing part? Sanjay! In the world Karna is known as 'Purushasingh'. 52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)