श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 1: भीष्मजीके धराशायी होनेसे कौरवोंका शोक तथा उनके द्वारा कर्णका स्मरण  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.1.49 
धृतराष्ट्र उवाच
यत् तद्वैकर्तनं कर्णमगमद् वो मनस्तदा।
अप्यपश्यत राधेयं सूतपुत्रं तनुत्यजम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले- संजय! जब तुम्हारा मन विकर्तनपुत्र कर्ण की ओर गया था, तब क्या तुमने शरीर त्यागने वाले सूतपुत्र राधानन्दन कर्ण को देखा था?
 
Dhritarashtra said- Sanjay! When your mind went towards Karna, the son of Vikartana, then did you see Radhanandan Karna, the son of Suta, who shed his body?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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