श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 1: भीष्मजीके धराशायी होनेसे कौरवोंका शोक तथा उनके द्वारा कर्णका स्मरण  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  7.1.47 
स हि शक्तो रणे राजंस्त्रातुमस्मान् महाभयात्।
त्रिदशानिव गोविन्द: सततं सुमहाभयात्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
राजन! जिस प्रकार भगवान विष्णु देवताओं को महान भय से सदैव बचाते हैं, उसी प्रकार कर्ण भी महान भय से बचाने में समर्थ है॥47॥
 
Rajan! Just as Lord Vishnu always protects the gods from great fear, similarly Karna is capable of saving us from great fear. 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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