श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 1: भीष्मजीके धराशायी होनेसे कौरवोंका शोक तथा उनके द्वारा कर्णका स्मरण  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.1.46 
जामदग्न्याभ्यनुज्ञातमस्त्रे दुर्वारपौरुषम्।
अगमन्नो मन: कर्णं बन्धुमात्ययिकेष्विव॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
राजन! कर्ण ने जमदग्निपुत्र परशुराम से अस्त्रविद्या सीखी है और उसका पराक्रम अतुलनीय है। इसीलिए हमारा हृदय कर्ण की ओर उसी प्रकार गया, जैसे विपत्ति के समय मनुष्य का हृदय अपने मित्रों और सम्बन्धियों की ओर चला जाता है। ॥46॥
 
King! Karna has learnt the art of weapons from Jamadagni's son Parshuram and his prowess is unmatchable. That is why our hearts went towards Karna, just like a man's heart goes towards his friends and relatives in times of great adversity. ॥ 46॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas