श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 1: भीष्मजीके धराशायी होनेसे कौरवोंका शोक तथा उनके द्वारा कर्णका स्मरण  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.1.42 
भीष्म: समरविक्रान्त: पाण्डवेयस्य भारत।
जघान समरे योधानसंख्येयपराक्रम:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
भारतवर्षमें वीरता दिखानेवाले सनातन पराक्रमी भीष्म ने युद्धस्थलमें पाण्डुनन्दन युधिष्ठिरके बहुतसे योद्धाओंको मार डाला ॥42॥
 
India The eternally valiant Bhishma, who displayed valor in the battlefield, killed many warriors of Pandunandan Yudhishthir in the battlefield. 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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