| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 1: भीष्मजीके धराशायी होनेसे कौरवोंका शोक तथा उनके द्वारा कर्णका स्मरण » श्लोक 24 |
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| | | | श्लोक 7.1.24  | अजावय इवागोपा वने श्वापदसंकुले।
भृशमुद्विग्नमनसो हीना देवव्रतेन ते॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | जैसे रक्षक के बिना भेड़-बकरियाँ भयंकर पशुओं से भरे हुए वन में भय के मारे व्याकुल रहती हैं, उसी प्रकार देवव्रत से रहित आपके पुत्र और सैनिक हृदय में अत्यंत व्याकुल हो गए॥ 24॥ | | | | Just as sheep and goats without a protector remain anxious out of fear in a forest infested with ferocious animals, similarly your sons and soldiers, deprived of Devavrata, became extremely anxious in their hearts.॥ 24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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