Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.1.16-17: हे नरसिंह! क्षत्रियधर्म का विचार करके वह अत्यन्त आश्चर्यचकित और प्रसन्न हुआ। फिर उसने उनके कठोर धर्म की निन्दा करते हुए महापराक्रमी भीष्म को प्रणाम किया और मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से महापराक्रमी भीष्म के लिए तकिया और शय्या बनाई। 16-17। | mahabharat अध्याय 7.1: भीष्मजीके धराशायी होनेसे कौरवोंका शोक तथा उनके द्वारा कर्णका स्मरण । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे नरसिंह! क्षत्रियधर्म का विचार करके वह अत्यन्त आश्चर्यचकित और प्रसन्न हुआ। फिर उसने उनके कठोर धर्म की निन्दा करते हुए महापराक्रमी भीष्म को प्रणाम किया और मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से महापराक्रमी भीष्म के लिए तकिया और शय्या बनाई। 16-17।
O lion of men! He was very surprised and pleased after thinking about the kshatriyadharma. Then, condemning his harsh dharma, he bowed down to the great Bhishma and created a pillow and a bed for the immensely valiant Bhishma with arrows having bent knots. 16-17.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥