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mahabharat 6.99.28: बड़े-बड़े प्रज्वलित उल्कापिंड सूर्य से टकराकर अचानक पृथ्वी पर गिर रहे थे, जिससे बड़े भय का समाचार मिल रहा था। 28.   |   mahabharat अध्याय 6.99: नवें दिनके युद्धके लिये उभयपक्षकी सेनाओंकी व्यूह-रचना और उनके घमासान युद्धका आरम्भ तथा विनाशसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 99: नवें दिनके युद्धके लिये उभयपक्षकी सेनाओंकी व्यूह-रचना और उनके घमासान युद्धका आरम्भ तथा विनाशसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.99.28 
ज्वलिताश्च महोल्का वै समाहत्य दिवाकरम्।
निपेतु: सहसा भूमौ वेदयन्त्यो महद् भयम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
बड़े-बड़े प्रज्वलित उल्कापिंड सूर्य से टकराकर अचानक पृथ्वी पर गिर रहे थे, जिससे बड़े भय का समाचार मिल रहा था। 28.
 
Huge blazing meteors were colliding with the Sun and suddenly falling on the Earth, giving news of great fear. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)