श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 99: नवें दिनके युद्धके लिये उभयपक्षकी सेनाओंकी व्यूह-रचना और उनके घमासान युद्धका आरम्भ तथा विनाशसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  6.99.24-25 
वेदयन्त्यो महाराज महद् वैशसमागतम्।
दिश: प्रज्वलिता राजन् पांसुवर्षं पपात च॥ २४॥
रुधिरेण समुन्मिश्रमस्थिवर्षं तथैव च।
रुदतां वाहनानां च नेत्रेभ्य: प्रापतज्जलम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वे सियार उस भयंकर विनाश की सूचना दे रहे थे जो होने वाला था। महाराज! सारी दिशाएँ जलने लगीं। चारों ओर धूल की वर्षा होने लगी। रक्त मिश्रित हड्डियाँ बरसने लगीं। रोते हुए वाहनों की आँखों से आँसू गिरने लगे।
 
Maharaj! Those jackals were informing about the terrible destruction that was about to happen. King! All directions seemed to be burning. Dust started raining everywhere. Bones mixed with blood started raining down. Tears started falling from the eyes of the crying Vahanas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)