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mahabharat 6.99.22: पक्षी आकाश में बहुत जोर से आवाज करते हुए चक्कर लगाने लगे। यद्यपि सूर्य उदय हो चुका था, फिर भी उस समय वह मन्द हो गया था। 22॥   |   mahabharat अध्याय 6.99: नवें दिनके युद्धके लिये उभयपक्षकी सेनाओंकी व्यूह-रचना और उनके घमासान युद्धका आरम्भ तथा विनाशसूचक उत्पातोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 99: नवें दिनके युद्धके लिये उभयपक्षकी सेनाओंकी व्यूह-रचना और उनके घमासान युद्धका आरम्भ तथा विनाशसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.99.22 
पक्षिणश्च महाघोरं व्याहरन्तो विबभ्रमु:।
सप्रभश्चोदित: सूर्यो निष्प्रभ: समपद्यत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पक्षी आकाश में बहुत जोर से आवाज करते हुए चक्कर लगाने लगे। यद्यपि सूर्य उदय हो चुका था, फिर भी उस समय वह मन्द हो गया था। 22॥
 
The birds started circling in the sky making very loud noises. Even though the sun had risen brightly, it became dull at that time. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)