श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 99: नवें दिनके युद्धके लिये उभयपक्षकी सेनाओंकी व्यूह-रचना और उनके घमासान युद्धका आरम्भ तथा विनाशसूचक उत्पातोंका वर्णन  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  6.99.17-18 
भीष्मं योद्‍धुमभीप्सन्त: संग्रामे विजयैषिण:।
क्ष्वेडा: किलकिला: शङ्खान् क्रकचान् गोविषाणिका:॥ १७॥
भेरीमृदङ्गपणवान् नादयन्तश्च पुष्करान्।
पाण्डवा अभ्यवर्तन्त नदन्तो भैरवान् रवान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म के साथ युद्ध में विजय पाने की इच्छा रखने वाले पाण्डवों ने सिंहनाद, कील-कील की ध्वनि, शंख की ध्वनि, क्रकच, गोश्रृंग, भेरी, मृदंग, पणव और पुष्कर आदि बाजे बजाते हुए तथा भैरव का जयघोष करते हुए कौरव सेना पर आक्रमण किया। 17-18॥
 
The Pandavas, desirous of winning the battle with Bhishma, attacked the Kaurava army with the sound of lion, the sound of Kil-Kil, the sound of the conch, playing the instruments like Krakach, Goshringa, Bheri, Mridang, Panav and Pushkar and shouting Bhairav. 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)