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mahabharat 6.98.6: परंतु तुम्हें स्मरण होगा, जब वीर पाण्डुनन्दन अर्जुन ने युद्ध में देवराज इन्द्र को परास्त करके खाण्डव वन की अग्नि को तृप्त किया था, वही उनकी अजेयता का पूर्ण प्रमाण है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 6.98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  6.98.6 
यदा तु पाण्डव: शूर: खाण्डवेऽग्निमतर्पयत्।
पराजित्य रणे शक्रं पर्याप्तं तन्निदर्शनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
परंतु तुम्हें स्मरण होगा, जब वीर पाण्डुनन्दन अर्जुन ने युद्ध में देवराज इन्द्र को परास्त करके खाण्डव वन की अग्नि को तृप्त किया था, वही उनकी अजेयता का पूर्ण प्रमाण है॥6॥
 
But you will remember, when the brave Pandunandan Arjun had defeated the Devraj Indra in the war and satisfied the fire in the Khandava forest, that is the complete proof of his invincibility. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)