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mahabharat 6.98.44: आपके सभी पुत्र भीष्म को चारों ओर से घेरकर प्रसन्नतापूर्वक चल रहे थे। उस समय वे पाण्डवों के मन में वेदना उत्पन्न कर रहे थे, पृथ्वी और स्वर्ग को कम्पित कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.98.44 
पुत्राश्च तव गाङ्गेयं परिवार्य ययुर्मुदा।
कम्पयन्तो भुवं द्यां च क्षोभयन्तश्च पाण्डवान्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
आपके सभी पुत्र भीष्म को चारों ओर से घेरकर प्रसन्नतापूर्वक चल रहे थे। उस समय वे पाण्डवों के मन में वेदना उत्पन्न कर रहे थे, पृथ्वी और स्वर्ग को कम्पित कर रहे थे।
 
All your sons also surrounded Bhishma from all sides and walked happily. At that time they were creating anguish in the minds of the Pandavas, shaking the earth and the heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)