Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.98.4-5: फिर अपने पुत्र को सान्त्वना देते हुए उससे इस प्रकार बोले - 'पुत्र दुर्योधन! तुम मुझे ऐसे शब्दबाणों से क्यों बींध रहे हो? मैं अपनी पूरी शक्ति से शत्रुओं पर विजय पाने का प्रयत्न कर रहा हूँ और तुम्हारे प्रिय कार्य में लगा हुआ हूँ। इतना ही नहीं, तुम्हें प्रसन्न करने के लिए मैं युद्ध की अग्नि में अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ। ॥4-5॥ | mahabharat अध्याय 6.98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फिर अपने पुत्र को सान्त्वना देते हुए उससे इस प्रकार बोले - 'पुत्र दुर्योधन! तुम मुझे ऐसे शब्दबाणों से क्यों बींध रहे हो? मैं अपनी पूरी शक्ति से शत्रुओं पर विजय पाने का प्रयत्न कर रहा हूँ और तुम्हारे प्रिय कार्य में लगा हुआ हूँ। इतना ही नहीं, तुम्हें प्रसन्न करने के लिए मैं युद्ध की अग्नि में अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ। ॥4-5॥
Then consoling your son, he said to him thus - 'Son Duryodhan! Why are you piercing me with such verbal arrows? I am trying to conquer the enemies to the best of my ability and am engaged in your favourite pursuit. Not only this, in order to please you, I am even ready to sacrifice my life in the fire of war. ॥ 4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥