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mahabharat 6.98.36: हे पुरुषश्रेष्ठ! मैं किसी भी प्रकार के युद्ध में स्त्री को अथवा पूर्वकाल में स्त्री रहे पुरुष को भी नहीं मार सकता; यह मैं तुमसे सत्य कहता हूँ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 6.98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.98.36 
नैवं चाहं स्त्रियं जातु न स्त्रीपूर्वं कथंचन।
हन्यां युधि नरश्रेष्ठ सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! मैं किसी भी प्रकार के युद्ध में स्त्री को अथवा पूर्वकाल में स्त्री रहे पुरुष को भी नहीं मार सकता; यह मैं तुमसे सत्य कहता हूँ॥ 36॥
 
O best of men! I can never kill a woman or even a man who was formerly a woman in any kind of war; I tell you this truth.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)