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mahabharat 6.98.33: इस विषय में भीष्म की रक्षा को मैं अपना परम कर्तव्य मानता हूँ। यदि वे सुरक्षित रहेंगे, तो हमारे सहायक होंगे और युद्धभूमि में कुन्तीपुत्रों का वध कर सकेंगे॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 6.98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.98.33 
तत्र कार्यतमं मन्ये भीष्मस्यैवाभिरक्षणम्।
स नो गुप्त: सहाय: स्याद्धन्यात् पार्थांश्च संयुगे॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
इस विषय में भीष्म की रक्षा को मैं अपना परम कर्तव्य मानता हूँ। यदि वे सुरक्षित रहेंगे, तो हमारे सहायक होंगे और युद्धभूमि में कुन्तीपुत्रों का वध कर सकेंगे॥ 33॥
 
‘In this matter, I consider the protection of Bhishma as my primary duty. If he is safe, he will be our helper and will be able to kill Kunti's sons on the battlefield.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)