श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.98.3 
उद्‍वृत्य चक्षुषी कोपान्निर्दहन्निव भारत।
सदेवासुरगन्धर्वं लोकं लोकविदां वर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भरत! तब समस्त ज्ञानियों में श्रेष्ठ भीष्म ने क्रोध से भरी हुई अपनी आँखें ऊपर उठाईं और ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे देवता, दानव और गन्धर्वों सहित सम्पूर्ण जगत को जला डालेंगे।
 
Bhaarata! Then Bhishma, the best amongst all the knowers of the world, raised his eyes in anger and looked as if he would burn the entire world including the Gods, Demons and Gandharvas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)