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mahabharat 6.98.21: ‘शिखण्डी पहले राजमहल में स्त्री रूप में उत्पन्न हुआ था; फिर वरदान के कारण वह पुरुष हो गया, अतः मेरी दृष्टि में यह स्त्री रूप शिखण्डिनी ही है ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 6.98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.98.21 
पूर्वं हि स्त्री समुत्पन्ना शिखण्डी राजवेश्मनि।
वरदानात् पुमाञ्जात: सैषा वै स्त्री शिखण्डिनी॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘शिखण्डी पहले राजमहल में स्त्री रूप में उत्पन्न हुआ था; फिर वरदान के कारण वह पुरुष हो गया, अतः मेरी दृष्टि में यह स्त्री रूप शिखण्डिनी ही है ॥21॥
 
‘Shikhandi was first born as a woman in the royal palace; Then due to the blessing he became a man, hence in my eyes this woman form is Shikhandini only. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)