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पूर्वं हि स्त्री समुत्पन्ना शिखण्डी राजवेश्मनि।
वरदानात् पुमाञ्जात: सैषा वै स्त्री शिखण्डिनी॥ २१॥
अनुवाद
‘शिखण्डी पहले राजमहल में स्त्री रूप में उत्पन्न हुआ था; फिर वरदान के कारण वह पुरुष हो गया, अतः मेरी दृष्टि में यह स्त्री रूप शिखण्डिनी ही है ॥21॥
‘Shikhandi was first born as a woman in the royal palace; Then due to the blessing he became a man, hence in my eyes this woman form is Shikhandini only. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥