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mahabharat 6.98.17: गांधारीपुत्र! जैसे मरते हुए मनुष्य को सारे वृक्ष स्वर्ण के समान दिखाई देते हैं, वैसे ही तुम भी सब कुछ विपरीत दृष्टि से देख रहे हो॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 6.98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.98.17 
मुमूर्षुर्हि नर: सर्वान् वृक्षान् पश्यति काञ्चनान्।
तथा त्वमपि गान्धारे विपरीतानि पश्यसि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
गांधारीपुत्र! जैसे मरते हुए मनुष्य को सारे वृक्ष स्वर्ण के समान दिखाई देते हैं, वैसे ही तुम भी सब कुछ विपरीत दृष्टि से देख रहे हो॥ 17॥
 
Gandhari's son! Just as a dying man sees all the trees as golden in colour, you too are seeing everything in the opposite manner.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)