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mahabharat 6.98.14-15: जो जगत् के रक्षक, शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले अनन्त पराक्रमी, सृष्टि और संहार के एकमात्र कर्ता, सनातन परमात्मा, सर्वज्ञ भगवान वासुदेव द्वारा सुरक्षित हैं, उन वेगशाली वीर पाण्डुपुत्र अर्जुन को युद्धस्थल में कौन हरा सकता है? 14-15॥   |   mahabharat अध्याय 6.98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 98: भीष्मका दुर्योधनको अर्जुनका पराक्रम बताना और भयंकर युद्धके लिये प्रतिज्ञा करना तथा प्रात:काल दुर्योधनके द्वारा भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  6.98.14-15 
को हि शक्तो रणे जेतुं पाण्डवं रभसं तदा।
यस्य गोप्ता जगद्‍गोप्ता शङ्खचक्रगदाधर:॥ १४॥
वासुदेवोऽनन्तशक्ति: सृष्टिसंहारकारक:।
सर्वेश्वरो देवदेव: परमात्मा सनातन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो जगत् के रक्षक, शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले अनन्त पराक्रमी, सृष्टि और संहार के एकमात्र कर्ता, सनातन परमात्मा, सर्वज्ञ भगवान वासुदेव द्वारा सुरक्षित हैं, उन वेगशाली वीर पाण्डुपुत्र अर्जुन को युद्धस्थल में कौन हरा सकता है? 14-15॥
 
Who can defeat that swift brave son of Pandu Arjuna in the battlefield, who is protected by the world protector, the infinite power wielding conch, disc and mace, the sole doer of creation and destruction, the eternal Supreme Soul, the omniscient Lord Vasudev? 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)