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mahabharat 6.97.5: वे पाण्डव स्वयं अजेय रहते हुए भी मेरी सेना का विनाश कर रहे हैं। कर्ण! इस प्रकार युद्ध में मेरी सेना और अस्त्र-शस्त्र नष्ट हो रहे हैं।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 6.97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.97.5 
अवध्यमानास्ते चापि क्षपयन्ति बलं मम।
सोऽस्मि क्षीणबल: कर्ण क्षीणशस्त्रश्च संयुगे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वे पाण्डव स्वयं अजेय रहते हुए भी मेरी सेना का विनाश कर रहे हैं। कर्ण! इस प्रकार युद्ध में मेरी सेना और अस्त्र-शस्त्र नष्ट हो रहे हैं।॥5॥
 
Those Pandavas are destroying my army while remaining invincible themselves. Karna! In this way my army and weapons are getting destroyed in the war. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)