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mahabharat 6.97.43: धर्मात्मा भीष्म से ऐसा कहकर आपके पुत्र राजा दुर्योधन ने आगे कुछ नहीं कहा ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 6.97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.97.43 
स एवमुक्त्वा नृपति: पुत्रो दुर्योधनस्तव।
नोवाच वचनं किञ्चिद् भीष्मं सत्यपराक्रमम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा भीष्म से ऐसा कहकर आपके पुत्र राजा दुर्योधन ने आगे कुछ नहीं कहा ॥43॥
 
Having said this to the virtuous Bhishma, your son King Duryodhana did not say anything further. ॥ 43॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीष्मं प्रति दुर्योधनवाक्ये सप्तनवतितमोऽध्याय:॥ ९७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें भीष्मके प्रति दुर्योधनका वचनविषयक सत्तानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९७॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४५ १/२ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)