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mahabharat 6.97.41-42: हे पराक्रमी राजन! यदि आप पाण्डवों पर दया करके अथवा मेरे दुर्भाग्य के कारण मुझ पर द्वेष करके उनकी रक्षा करें, तो रणभूमि में यशस्वी कर्ण को युद्ध की अनुमति दीजिए। वह अपने मित्रों और सम्बन्धियों सहित कुन्तीपुत्रों पर अवश्य विजय प्राप्त करेगा। 41-42॥   |   mahabharat अध्याय 6.97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  6.97.41-42 
दयया यदि वा राजन् द्वेष्यभावान्मम प्रभो।
मन्दभाग्यतया वापि मम रक्षसि पाण्डवान्॥ ४१॥
अनुजानीहि समरे कर्णमाहवशोभिनम्।
स जेष्यति रणे पार्थान् ससुहृद्‍गणबान्धवान्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे पराक्रमी राजन! यदि आप पाण्डवों पर दया करके अथवा मेरे दुर्भाग्य के कारण मुझ पर द्वेष करके उनकी रक्षा करें, तो रणभूमि में यशस्वी कर्ण को युद्ध की अनुमति दीजिए। वह अपने मित्रों और सम्बन्धियों सहित कुन्तीपुत्रों पर अवश्य विजय प्राप्त करेगा। 41-42॥
 
Mighty king! If you protect the Pandavas out of pity for them or out of hatred towards me due to my misfortune, then give permission for the war to Karna, who is famous in the battlefield. He will definitely conquer the sons of Kunti along with his friends and relatives. 41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)