श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना  »  श्लोक 36-38
 
 
श्लोक  6.97.36-38 
उवाच प्राञ्जलिर्भीष्मं बाष्पकण्ठोऽश्रुलोचन:।
त्वां वयं हि समाश्रित्य संयुगे शत्रुसूदन॥ ३६॥
उत्सहेम रणे जेतुं सेन्द्रानपि सुरासुरान्।
किमु पाण्डुसुतान् वीरान् ससुहृद्‍गणबान्धवान्॥ ३७॥
तस्मादर्हसि गाङ्गेय कृपां कर्तुं मयि प्रभो।
जहि पाण्डुसुतान् वीरान् महेन्द्र इव दानवान्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद नेत्रों में आँसू भरकर और हाथ जोड़कर रुँधे हुए स्वर से वे भीष्म से बोले - 'शत्रुसूदन! हम आपकी शरण में आये हैं और युद्धस्थल में इन्द्र सहित समस्त देवताओं और दैत्यों को परास्त करने के लिए आतुर हैं; फिर वीर पाण्डवों को उनके बन्धु-बान्धवों सहित परास्त कर देना कौन बड़ी बात है। अतः हे प्रभु! गंगापुत्र! आप मुझ पर कृपा करें। जिस प्रकार देवराज इन्द्र दैत्यों का संहार करते हैं, उसी प्रकार आप भी वीर पाण्डवों का संहार करें।'
 
After this, with tears in his eyes and folded hands, he spoke to Bhishma with a choked voice - 'Shatrusudan! We have taken shelter in you and are eager to defeat all the gods including Indra and the demons in the battlefield; then what is a big deal in defeating the brave Pandavas along with their friends and relatives. Therefore, Lord! Son of Ganga! You should be kind to me. Just as the king of gods Indra kills the demons, you should kill the brave Pandavas in the same way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)