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mahabharat 6.97.31: बहुत से सेवक सुगन्धित तेल से भरे हुए जलते हुए स्वर्णमय दीपक लिए हुए महाराज दुर्योधन को चारों ओर से घेरे हुए चल रहे थे ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 6.97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.97.31 
प्रदीपै: काञ्चनैस्तत्र गन्धतैलावसेचितै:।
परिवव्रुर्महाराजं प्रज्वलद्भि: समन्तत:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
बहुत से सेवक सुगन्धित तेल से भरे हुए जलते हुए स्वर्णमय दीपक लिए हुए महाराज दुर्योधन को चारों ओर से घेरे हुए चल रहे थे ॥31॥
 
Many servants carrying burning golden lamps filled with fragrant oil were walking surrounding Maharaja Duryodhana from all sides. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)