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mahabharat 6.97.20: हे नरसिंह महाराज! आपका पुत्र दुर्योधन माथे पर मुकुट, भुजाओं में अंगद, हाथों में कुण्डलियाँ आदि आभूषण धारण किये हुए मार्ग में जाता हुआ अत्यन्त शोभायमान हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 6.97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 97: दुर्योधनका अपने मन्त्रियोंसे सलाह करके भीष्मसे पाण्डवोंको मारने अथवा कर्णको युद्धके लिये आज्ञा देनेका अनुरोध करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.97.20 
अंगदी बद्धमुकुटो हस्ताभरणवान् नृप।
धार्तराष्ट्रो महाराज विबभौ स पथि व्रजन्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे नरसिंह महाराज! आपका पुत्र दुर्योधन माथे पर मुकुट, भुजाओं में अंगद, हाथों में कुण्डलियाँ आदि आभूषण धारण किये हुए मार्ग में जाता हुआ अत्यन्त शोभायमान हो रहा था।
 
Lord of men! Maharaj! Your son Duryodhana was looking very handsome while going on the road wearing a crown on his forehead, Angad on his arms and rings and other ornaments in his hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)