अंगदी बद्धमुकुटो हस्ताभरणवान् नृप।
धार्तराष्ट्रो महाराज विबभौ स पथि व्रजन्॥ २०॥
अनुवाद
हे नरसिंह महाराज! आपका पुत्र दुर्योधन माथे पर मुकुट, भुजाओं में अंगद, हाथों में कुण्डलियाँ आदि आभूषण धारण किये हुए मार्ग में जाता हुआ अत्यन्त शोभायमान हो रहा था।
Lord of men! Maharaj! Your son Duryodhana was looking very handsome while going on the road wearing a crown on his forehead, Angad on his arms and rings and other ornaments in his hands.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥